सुहास ललीनाकेरे यथिराज का जीवन परिचय | Suhas Lalinakere Yathiraj Biography in Hindi

दोस्तों आपने सफलता की कहानियां तो कई सुनी होगी लेकिन आज की स्टोरी सबसे अलग हैं सुहास
ललीनाकेरे जो 2007 बैच के IAS officer हैं लेकिन उनकी रुचि बैडमिंटन में थी इसलिए उन्होंने खेल पर ध्यान दिया जिसकी वजह से
उन्होंने नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर कई सारे खिताब अपने नाम किए। आइए जानते हैं सुहास ललीनाकेरे यथिराज का जीवन
परिचय | Suhas Lalinakere Yathiraj Biography in Hindi।

शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा जो IAS की परीक्षा पास करके खेल में जायेगा क्योंकि सिविल सर्विसेज
की परीक्षा पास करना अपने आप में ही एक चुनौती होती हैं जिसे लाखो में से सिर्फ कुछ लोग ही पास
कर पाते हैं इसलिए IAS की नौकरी के बाद भी खेल को महत्व देना अपने आप में ही बड़ी बात हैं।

सुहास यथिराज एसएल4 श्रेणी में फिलहाल विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर हैं और भारत के पहले
IAS ऑफिसर हैं जो Paralympics खेल रहा हैं इसलिए यह अपने आप में ही एक विश्व रिकॉर्ड के जैसा हैं।

सुहास यथिराज जिनके बारे में शायद लोग 1 महीने पहले इतना नहीं जानते थे लेकिन अब उनकी
पढ़ाई, जन्म स्थान, कैसे IAS ऑफिसर बने इस पर चर्चा हो रहीं हैं आइए जानते हैं सुहास ललीनाकेरे
यथिराज का जीवन परिचय | Suhas Lalinakere Yathiraj Biography in Hindi।

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सुहास ललीनाकेरे यथिराज कौन हैं?

सुहास LY (Lalinakere Yathiraj) उत्तर प्रदेश के बैच 2007 के IAS ऑफिसर हैं जिसकी पोस्टिंग
अलग अलग राज्य में हो चुकी हैं इसलिए उन्हें अपने फील्ड का अच्छा ज्ञान हैं। सुहास भारत के पहले
IAS ऑफिसर हैं जो नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर बैडमिंटन टूर्नामेंट में हिस्सा ले चुके हैं।

और इसी के साथ भारत के इतिहास में अब तक किसी IAS ऑफिसर ने Paralympics में देश का प्रतिनिधित्व नहीं किया हैं।

इसलिए सुहास का नाम इतना चर्चा का विषय बना हुआ हैं, सुहास कई शहरों में DM (District
Magistrate) रहे हैं जिसमे प्रयागराज, आजमगढ़ और जौनपुर जैसे जिले शामिल हैं। सुहास अभी नोएडा में गौतम बुद्ध नगर के DM के रूप
में कार्यरत हैं।

PositionPlaceTenure
ProbationerAgra1 year
Joint MagistrateAzamgarh1 year 3 months
Chief DevelopmentMathura4 months
District MagistrateMaharajganj3 months
District MagistrateHathras10 months
District MagistrateSonbhadra3 months
District MagistrateJaunpur2 years 3 months
District MagistrateAzamgarh1 year 11 months
District MagistratePrayagraj1 year 4 months
District MagistrateGautam Buddha NagarIncumbent

सुहास को आज कई युवा अपना रोल मॉडल भी मान रहे हैं क्योंकि उन्होंने ऐसा काम किया हैं जो ज्यादातर
लोग करने से कतराते हैं चाहिए उनके जीवन के बारे में थोड़ा और विस्तार से जानते हैं। सुहास
ललीनाकेरे यथिराज का जीवन परिचय | Suhas Lalinakere Yathiraj Biography in Hindi

सुहास यथिराज का जन्म और पढ़ाई कहां से हुई?

दोस्तों सुहास युथिराज का जन्म 2 जुलाई सन 1983 में कर्नाटक के एक परिवार में हुआ था इनके भाई का नाम शारथ LY था। सुहास एलवाई की बचपन की पढ़ाई नजदीक के हसन डिस्ट्रिक्ट में हुई।

सुहास युथिराज के पापा गवर्नमेंट नौकरी में थी और उनके पापा की पोस्टिंग अन्य राज्य में हो जाती थी
जिसकी वजह से इनके पूरे परिवार को अलग अलग जगह और राज्य में रहना पड़ता था।

लेकिन सुहास की ज्यादातर पढ़ाई DVS independent College Shivamogga में हुई जो कर्नाटक में ही मौजूद था इसके बाद वे
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से कंप्यूटर साइंस से ग्रेजुएट हुए उनकी ग्रेजुएशन 2004 में खत्म हो गई थी।

माना जाता हैं की सुहास बचपन से ही पढ़ाई में काफी अच्छे थे और उनको देश की सेवा करने का
भी जुनून था हालांकि उन्हें खेलों में भी रुचि थी।

IAS बनने का सफर?

सुहास का पूरा परिवार चाहता था की वो एक अच्छे डॉक्टर बनें लेकिन उनकी दिलचस्पी इंजीनियरिंग में
थी इसलिए उन्होंने 2004 में कंप्यूटर साइंस से ग्रेजुएशन कंप्लीट की और आगे की पढ़ाई शुरू की।

कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग करने के बाद सुहास को अपनी जिंदगी में कुछ कमी लगी और फिर उनकी रुचि सिविल सर्विसेज की तरफ होने लगी जिसके बाद उन्होंने UPSC परीक्षा में बैठने की तैयारी शुरू कर दी।

UPSC की परीक्षा देने के लिए हर साल लाखों स्टूडेंट अपनी मेहनत को आजमाते हैं लेकिन सिर्फ कुछ लोग ही उस मुकाम तक पहुंच पाते हैं

इसके बाद 2007 में वे भारत के पहले विशेष रूप से विकलांग IAS अधिकारी बने और आगरा से अपने करियर की शुरुवात की।

IAS बनने के बाद सुहास लिखते हैं की “मैं भगवान का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं क्योंकि जब मैं
पढ़ता था तो मैने जिला कलेक्टर बनने के बारे में सोचा भी नहीं था” यह एक सपना था जो सच होना
था और मैं IAS बन गया।

बैडमिंटन में विश्व स्तरीय रिकॉर्ड बनाए

सुहास ये कहते हैं की “खेल मेरे जीवन का एक हिस्सा हैं” इसलिए उन्होंने बड़े लेवल पर बैडमिंटन खेलना शुरू
किया।

2016 में वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक खेल में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले IAS बने। सुहास की खेल
महत्वाकांक्षा ने 2016 एशियाई पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप में भारत के लिए एक ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता।

तमाम बाधाओं के बावजूद सुहास ने फिर से इतिहास की किताबों में जगह बना ली थी।

सुहास कहते हैं कि कभी हम जीतते हैं और कभी हारते हैं, लेकिन प्रयास से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
वह यह भी कहते हैं कि असुरक्षा पर काबू पाना जीवन में सबसे महत्वपूर्ण चीज है।

इसके लिए सुहास का मानना है अपनी कमजोरियों को हराना होगा ऐसा न हो की कमजोरी आपको हरा दे क्योंकि
अगर ऐसा हुआ तो आप कभी आसमान नहीं छू पाओगे इसलिए अपनी कमजोरियों को ताकत में बदलना होगा जिसके लिए
माता पिता का समर्थन और विश्वास बहुत जरूरी हैं।

उन्होंने एक आईएएस अधिकारी और एक पेशेवर खिलाड़ी के रूप में अपने अनुभव को साझा करते हुए, कई उद्देश्यों को
पूरा करने में सक्षम होने के लिए समय प्रबंधन के महत्व पर भी जोर दिया।

सुहास ने कई मेडल अपने नाम किए

सुहास ने 2017 और 2019 में बीडब्ल्यूएफ तुर्की पैरा बैडमिंटन चैम्पियनशिप में पुरुष एकल और युगल स्वर्ण जीता।

उन्होंने ब्राजील में 2020 में स्वर्ण पदक जीता। जब जुलाई में तोक्यो पैरालिंपिक में उनकी भागीदारी की पुष्टि हुई तो सुहास ने कहा कि यह प्रतियोगिता निस्संदेह एक चुनौती होगी और अपनी श्रेणी में दुनिया के तीसरे नंबर के खिलाड़ी होने के नाते, वह पदक के दावेदार होंगे।

इसके बाद हाल ही में हुए टोक्यो के पैरालंपिक में उन्होंने सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम गर्व से चौड़ा कर दिया हैं।

Paralympics में सिल्वर मेडल जीता

सुहास भारत के पहले ऐसे IAS ऑफिसर हैं जिन्होंने देश के लिए सिल्वर मेडल जीता हैं हालांकि देशवासी सोच रहे थे की वो गोल्ड मेडल लेकर आएंगे लेकिन फ्रांस के लुकास मजूर ने सुहास को 11-10 से शिकस्त देकर सुहास को सिल्वर मेडल प्राप्त हुआ।

रविवार को SL4 वर्ग के फाइनल में फ्रांस के शीर्ष वरीयता प्राप्त लुकास मजूर के खिलाफ हारने के बाद भी सुहास युथिराज ने वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किया। फाइनल स्कोर 21-15, 17-21 और 15-21 रहा जिसके बाद सुहास को सिल्वर मेडल मिला।

निष्कर्ष?

दोस्तों मुझे पूरी उम्मीद हैं आज की पोस्ट जिसका नाम सुहास ललीनाकेरे यथिराज का जीवन परिचय | Suhas Lalinakere Yathiraj
Biography in Hindi हैं आपको सुहास युथिराज की स्टोरी से बहुत कुछ सीखने को मिला होगा।

सुहास की स्टोरी ने आज यह साबित कर दिया हैं की चाहे आप कितने भी बड़े पद पर पहुंच जाओ
लेकिन उसके बाद भी अपने सपने और खेल को जिंदगी में आगे बढ़ाया जा सकता हैं।

यह पोस्ट अपने दोस्तों को भी शेयर कीजिए क्योंकि भारत में पहली बार ऐसा कारनामा किसी IAS ने करके दिखाया
हैं इसलिए इसकी जानकारी सभी लोगों को जरूर होना चाहिए।

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